सामाजिक सुरक्षा योजना 2021 | Samajik Suraksha Yojana 2021

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सामाजिक सुरक्षा योजना 2021 | Samajik Suraksha Yojana 2021
सामाजिक सुरक्षा योजना 2021 | Samajik Suraksha Yojana 2021

जाने क्या है सामाजिक सुरक्षा योजना 2021 | Samajik Suraksha Yojana 2021

क्या आपको पता है सामाजिक सुरक्षा योजना क्या है और आप इसका कैसे लाभ उठा सकते है। सामाजिक सुरक्षा योजनाएं समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके लोगों को बीमा सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थीं। कम आय वाले समूह को ध्यान में रखते हुए इन योजनाओं के प्रीमियम को काफी कम रखा गया है, इस सामाजिक सुरक्षा योजना का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिल सके। इन योजनाओं को बैंक खातों के माध्यम से ही लिया जा सकता है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी वित्तीय समावेशन योजना के माध्यम से व्यापक स्तर पर बैंकिंग सुविधाएं देने के लिए काफी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के अंतर्गत 21 जुलाई 2016 तक 9.61 करोड़ पॉलिसियां और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के अंतर्गत 3.03 करोड़ पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं। अभी तक पीएमजेजेबीवाई के अंतर्गत 36,000 दावे पंजीकृत हुए और 31,200 से ज्यादा दावों का निस्तारण कर दिया गया। इसी प्रकार पीएमएसबीवाई के अंतर्गत इस साल 21 जुलाई 7,025 और पीएमएसबीवाई के अंतर्गत 4,551 दावों का निस्तारण कर दिया गया।

सामाजिक सुरक्षा योजना का पड़ रहा सकारात्मक प्रभाव

सामाजिक सुरक्षा योजना समाज पर अपना सकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। राज्य सरकारें और जिला प्रशासन को इस सामाजिक सुरक्षा योजना में भागीदार बनाया गया है। जिलों और शहरों में इन योजनाओं की सफलता की तमाम कहानियां हैं। लोग न सिर्फ आर्थिक तौर पर सशक्त हो रहे हैं, बल्कि उनका जीवन भी बेहतर हो रहा है। उनकी महत्वाकांक्षाएं बढ़ रही हैं। यह वास्तविक वित्तीय समावेशन है। भ्रष्टाचार कम हो रहा है, क्योंकि पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में आ रहा है। और इन योजनाओं का यही मुख्य उद्देश्य है। अब सामाजिक सुरक्षा नए मुकाम हासिल कर रही है अभी ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ रहे हैं।

सामाजिक सुरक्षा योजना 2021 | Samajik Suraksha Yojana 2021

केंद्र सरकार द्वारा श्रमिकों के लाभ के लिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिसूचित कर सकती है। इनमें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना, कर्माचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (ईडीएलआई) योजना शामिल हैं। ये क्रमशः भविष्य निधि, पेंशन फंड और बीमा योजना प्रदान करती हैं। सरकार निम्नलिखित को भी अधिसूचित कर सकती है:

  • बीमारी, मातृत्व और अन्य लाभ प्रदान करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना,
  • रोजगार के पांच वर्ष पूर्ण होने या मृत्यु जैसी कुछ स्थितियों में पांच वर्ष से कम पर श्रमिकों को ग्रैच्युटी,
  • महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ
  • भवन निर्माण और निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए सेस
  • व्यवसायगत चोट या बीमारी की स्थिति में कर्मचारियों और उनके आश्रितों को मुआवजा।

सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान

ईपीएफ, ईपीएस, ईडीएलआई और ईएसआई योजनाओं को नियोक्ता और कर्मचारियों के अंशदान से वित्त पोषित किया जाएगा। उदाहरण के लिए ईपीएफ योजना के मामले में नियोक्ता और कर्मचारी 10% वेतन का एक बराबर अंशदान देंगे या सरकार द्वारा अधिसूचित ऐसी ही किसी दूसरी दर पर अंशदान देंगे। ग्रैच्युटी के भुगतान, मातृत्व लाभ, भवन निर्माण श्रमिकों के लिए सेस, और कर्मचारी को मुआवजे का भुगतान नियोक्ता द्वारा वहन किया जाएगा। गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों के लिए योजनाओं को नियोक्ता, कर्मचारी और संबंधित सरकार के अंशदानों से वित्त पोषित किया जा सकता है।

सामाजिक सुरक्षा योजना 2021 संगठन | Samajik Suraksha Yojana 2021 : Organization

संहिता सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए अनेक निकायों को स्थापित कर सकती है।

  1. ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड, जिसके प्रमुख केंद्रीय भविष्य निधि कमीश्नर होंगे,
  2. ईएसआई योजना को प्रबंधित करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम। जिसके प्रमुख केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त चेयरपर्सन होंगे,
  3. असंगठित श्रमिकों से संबंधित योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर सामाजिक सुरक्षा बोर्ड, जिनकी अध्यक्षता केंद्रीय और राज्य स्तरीय श्रम और रोजगार मंत्रियों द्वारा की जाएगी,
  4. भवन निर्माण श्रमिकों से संबंधित योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए राज्य स्तरीय भवन निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड्स, जिनकी अध्यक्षता राज्य सरकार द्वारा नामित चेयरपर्सन करेंगे।

अपराध और सजा

संहिता विभिन्न अपराधों के लिए सजा निर्दिष्ट करती है, जैसे कर्मचारी के हिस्से को काटने के बाद नियोक्ता संहिता के अंतर्गत अंशदान का भुगतान नहीं करता तो उसे एक से तीन साल तक की कैद और एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा, दूसरा रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा करने पर छह महीने तक की कैद की सजा हो सकती है।

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